वरुण सिंह भाटी का जीवन परिचय | Varun singh bhati biography in Hindi

Varun singh bhati biography in Hindi

दोस्तों आप में से बहुत से लोगों को वरुण सिंह जी के बारे में पता होगा लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होंगे जिन्हें इनके बारे में पूरी जानकारी नही होगी इसीलिए आज इस आर्टिकल में हम आपको वरुण सिंह भाटी के बारे में पूरी जानकारी देने वाले हैं, जो लोग इनके बारे में पूरी जानकारी चाहते है वो हमारे इस आर्टिकल को पूरा जरुर पढ़ें.

Varun singh bhati biography in Hindi

वरुण सिंह भाटी का जीवन परिचय (Varun singh bhati biography in Hindi)

वरुण भाटी का जन्म 13 फ़रवरी 1995 को दिल्ली में हुआ था, इनके पिता का नाम हेम सिंह है और ये अपनी फॅमिली के साथ नॉएडा में रहते है वरुण को बचपन से ही पोलियो की बीमारी थी जिससे उनका एक पैर पोलियो ग्रसित हो गया था लेकिन वरुण ने अपनी इस बीमारी को कभी भी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया, उन्होंने इसे अपनी ताकत बना लिया.

वरुण सिंह भाटी का पूरा परिचय

पूरा नाम वरुण सिंह भाटी
जन्म 13 फ़रवरी 1995
जन्म स्थान जमालपुर गाँव, नॉएडा
पिता का नाम हेम सिंह भाटी
कोच सत्यनारायण
हाईट 5 फीट 11 इंच
खेल पैरा एथलेटिक्स हाई जम्प
उम्र 21
राष्ट्रीयता भारतीय
सबसे पहले जाने गए 2012 के पैरालिम्पिक में क्वालिफाइड हुए थे.

वरुण ने अपनी स्कूल की पढ़ाई  सेंट जोसेफ स्कूल से पूरी की थी स्कूल के स्पोर्ट्स डे में वरुण इसमें बढ़ चढ़ के हिस्सा लेते थे जिससे यही से उनके खेल को बढ़ावा मिला. वे अपनी पढाई और खेल के बीच बहुत अच्छे से सामन्जस्य बैठा लेते थे और दोनों में ही अच्छे थे. वरुण की इस प्रतिभा को उनके स्कूल वालों ने समझा और उन्हें पूरा सपोर्ट किया. उसके बाद वरुण को राष्ट्रीय स्तर पर एथलीट सत्यनारायण जी का साथ मिला, जिन्होंने वरुण को सही दिशा में ट्रेनिंग देना शुरू किया, वरुण इस समय बीएससी मैथ्स के स्टूडेंट है.

वरुण भाटी करियर कैसा था?

वरुण दुनिया में तब फेमस हुए जब साल 2012 में लन्दन के पैरालिम्पिक खेल को उन्होंने A ग्रेड से क्वालिफाई किया था. यहाँ पर उन्होंने अपनी परफॉरमेंस 1.60 मिनट में पूरी की. वैसे तो यहाँ लन्दन के इस पैरालिम्पिक में सीमित सीट थी इसीलिए वरुण का नाम लिस्ट से हटा दिया गया था. इसके बाद इन्होने साल 2014 में कोरिया में ‘एशियन पैरा गेम्स’ में हिस्सा लिया, जहाँ पर इन्हें हाई जम्प में 5th स्थान मिला था इसी के साथ साल 2014 में चाइना में ‘ओपन एथलेटिक्स चैंपियनशिप’ में वरुण ने गोल्ड मैडल जीतकर भारत का बहुत ऊँचा कर दिया. इसके बाद साल 2015 में दोहा में आयोजित ‘पैरा विश्व चैंपियनशिप’ में वरुण को फिर से 5th स्थान मिला था. यहाँ वरुण की परफॉरमेंस बाकि पैरा हाई जम्प भारतीय खिलाड़ी ‘एच एन गिरिशा’ और ‘शरद कुमार’ से बेहतर थी.

साल 2016 में ‘आईपीसी एथलेटिक्स एशियन-ओशिनिया चैंपियनशिप’ में वरुण ने 1.82 मिनट में अपनी अच्छी परफॉरमेंस से गोल्ड मैडल जीता, साथ ही साथ इन्होने एक नया एशियन रिकॉर्ड भी कायम कर दिया था. साल रियो 2016 में ग्रीष्मकालीन पैरालिम्पिक खेल में वरुण ने ब्रोंज पदक भी जीता है, और इसी प्रतिस्पर्धा में भारत के मारियप्पन थान्गावेलु ने प्रथम स्थान पाकर गोल्ड मैडल जीता है. अमेरिका के सैम ग्रेवे ने सिल्वर मैडल जीता है, इसी में 6वें नम्बर पर भारत के शरद कुमार रहे है इस जीत के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने वरुण को 1 करोड़ की राशि देने की घोषणा की है.

भारत सरकार द्वारा कौन से पुरुस्कार मिलेंगे?

अब भारत सरकार द्वारा पैरालम्पिक खेल में गोल्ड मैडल जीतने वाले को 75 लाख रूपये, सिल्वर मैडल जीतने वाले को 50 लाख रूपये एवं ब्रोंज मैडल विजेता को 30 लाख रूपये की राशि प्रदान करने की घोषणा की है. भारतीय पैरालिम्पिक्स के खिलाड़ियों के लिए यह एक बहुत बड़ी घोषणा है.

पैरालिम्पिक गेम्स क्या है?

पैरालिम्पिक गेम्स एक बड़ा अन्तराष्ट्रीय खेल होता है इसमें किसी भी तरह से अक्षम लोगों को सेलेक्ट किया जाता है, पहला पैरालिम्पिक गेम्स 1960 में आयोजित हुआ था जिसमें 23 देशों के 400 एथलीट ने भाग लिया था. साल 1960 के बाद से हर उस साल जब ओलंपिक का आयोजन किया जाता है तभी पैरालिम्पिक का भी आयोजन किया जाता है. शुरुवात में इस गेम्स में सिर्फ वही लोग आ सकते थे जो व्हीलचेयर में रहते है लेकिन 1976 से ग्रीष्मकालीन गेम्स में किसी भी तरह से अक्षम लोग हिस्सा ले सकते है जिसके बाद साल 1976 में 40 देशों से 1600 एथलीटो ने हिस्सा लिया था. 1988 में साउथ कोरिया में ओलंपिक गेम्स के होने के बाद पैरालिम्पिक गेम्स कराया गया है ये आयोजन उसी शहर में किया गया था जहाँ पर ओलंपिक कराया गया था और वो सभी सुविधायें पैरालिम्पिक खिलाडियों को भी दी गई थी. साल 1988 के बाद 1992, 1996 एवं 2000 में भी ऐसा पैरालिम्पिक का आयोजन किया गया था. साल 2001 में अन्तराष्ट्रीय पैरालिम्पिक कमिटी और अन्तराष्ट्रीय ओलंपिक कमिटी के बीच एक अग्रीमेंट साइन हुआ था, जिसमें 2020 तक ऐसें ही दोनों गेम्स एक के बाद आयोजित होने के बारे में कहा गया था. 

साल 2016 के पैरालिम्पिक गेम में भारत से 16 पुरुष एवं 3 महिला गयी थी पैरालिम्पिक गेम्स में भारत को कुल 4 मैडल मिले चुके है जिसमें मारियप्पन थान्गावेलु को पुरुष वर्ग में हाई जम्प के लिए गोल्ड मैडल मिला था. इसके अलावा देवेन्द्र झाझड़िया को भाला फेंक में पुरुष वर्ग में गोल्ड मैडल मिला. महिला शॉटपुट में दीपा मलिक को सिल्वर मैडल एवं वरुण सिंह भाटी को हाई जम्प में ब्रोंज मैडल मिला है. इस तरह इन पैरालिम्पिक खिलाडियों ने भारत का नाम बहुत ऊँचा कर दिया है, जहाँ रियो ओलंपिक 2016 में एक भी खिलाड़ी को एक भी गोल्ड मैडल नहीं मिला, वही पैरालिम्पिक में पैरा खिलाड़ियों को 2 गोल्ड मैडल भारत को मिले है.

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आज आपने क्या सीखा?    

दोस्तों हम उम्मीद करते है कि हमारा ये (Varun singh bhati biography in Hindi) आर्टिकल आपको काफी पसंद आया होगा और आपके लिए काफी हेल्पफुल भी होगा क्युकी इसमें हमने आपको वरुण सिंह भाटी के जीवन के बारे में पूरी जानकारी दी है

हमारी ये (Varun singh bhati biography in Hindi) जानकारी आपको कैसी लगी कमेंट करके जरुर बताइयेगा और ज्यादा से ज्यादा लोगो के साथ भी जरुर शेयर कीजियेगा.

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