मौलाना अबुल कलाम आज़ाद का जीवन परिचय | Maulana Abul Kalam Azad Biography In Hindi

Maulana Abul Kalam Azad Biography In Hindi

दोस्तों मौलाना अबुल कलाम आजाद जी के बारे में आप सभी लोगो ने सुना ही होगा लेकिन आप में से बहुत से कैंडिडेट ऐसे भी होंगे जिन्हें इनके बारे में पूरी जानकारी नही होगी इसीलिए आज इस आर्टिकल में हम आपको मौलाना अबुल कलाम आजाद जी के बारे में पूरी जानकारी देंगे, तो जिन लोगो को इनके जीवन परिचय के बारे में जानकारी नही है वो इस आर्टिकल को पूरा जरुर पढ़ें.

Maulana Abul Kalam Azad Biography In Hindi

मौलाना अबुल कलाम आज़ाद का जीवन परिचय 

मौलाना अबुल कलाम आजाद का असली नाम अबुल कलाम गुलाम मुहियुद्दीन था लेकिन लोग इन्हें मौलाना आजाद नाम से ही जानते है मौलाना आजाद जी एक महान वैज्ञानिक, एक राजनेता और कवि भी थे स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई के समय मौलाना आजाद मुख्य सेनानियों में से एक थे. ये एक पेशेवर थे लेकिन इन्होने आजादी की लड़ाई में हिस्सा लेने के लिए अपने पेशेवर काम को भी छोड़ दिया था और देश की आजादी के लिए सभी लोगों के साथ मिलकर काम करने लगे. मौलाना आजाद जी गाँधी जी के अनुयायी थे उन्होंने गाँधी जी के साथ अहिंसा का साथ देते हुए “सविनय अवज्ञा और असहयोग आंदोलन” में भी हिस्सा लिया था. मौलाना आजाद जी धार्मिक सद्भाव के लिए काम किया है और ये देश विभाजन के कट्टर प्रतिद्वंद्वी भी थे मौलाना आजाद जी ने लम्बे समय तक भारत की आजादी के लिए लड़ाई लड़ी थी, साथ ही भारत और पाकिस्तान विभाजन के गवाह भी बने, लेकिन एक सच्चे भारतीय होने के कारण उन्होंने स्वतंत्रता के बाद भारत में रहकर इसके विकास में कार्य किया और पहले शिक्षा मंत्री बनकर देश की शिक्षा पद्धति को सुधारने का भी ज़िम्मा उठाया था.

मौलाना अबुल कलाम आज़ाद का जीवन परिचय  (Maulana Abul Kalam Azad Biography)

जीवन परिचय बिंदु मौलाना आजाद जीवन परिचय
पूरा नाम अबुल कलाम गुलाम मुहियुद्दीन
जन्म 11 नवम्बर 1888
जन्म स्थान मक्का, सऊदी अरब
पिता मुहम्मद खैरुद्दीन
पत्नी जुलेखा बेगम
मृत्यु 22 फ़रवरी 1958 नई दिल्ली
राजनैतिक पार्टी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
नागरिकता भारतीय
अवार्ड भारत रत्न

 

मौलाना अबुल कलाम आजाद जी का जन्म 11 नवम्बर 1888 को मक्का सऊदी अरब में हुआ था इनके पिता का नाम मोहम्मद खैरुद्दीन एक बंगाली मौलाना थे जो एक बड़े विद्वान भी थे और इनकी माता अरब की थी. मौलाना खैरुद्दीन अपने परिवार के साथ बंगाली राज्य में रहते थे, लेकिन 1857 के समय में हुई विद्रोह की लड़ाई में उन्हें भारत देश छोड़ कर अरब जाना पड़ा, जहाँ मौलाना आजाद जी का जन्म हुआ था. मौलाना आजाद जब 2 वर्ष के थे, तब 1890 में उनका परिवार वापस भारत आ गया और कलकत्ता में बस गया. मौलाना अबुल कलाम आजाद जी की शादी 13 साल की जुलेखा बेगम से हुई थी.

मौलाना अबुल कलाम आजाद जी की एजुकेशन क्या थी?

मौलाना आजाद को परम्परागत इस्लामी शिक्षा दी गई, लेकिन मौलाना आजाद के परिवार के सभी वंशों को इस्लामी शिक्षा का अच्छा ज्ञान था और ये ज्ञान मौलाना आजाद को एक विरासत के रूप में मिला. आजाद को शुरूआती शिक्षा घर पर ही उनके पिता द्वारा दी गई, इसके बाद उनकी शिक्षा के लिए शिक्षक नियुक्त किये गए, आजाद ने सबसे पहले अरबी, और फारसी भाषा सीखी, उसके बाद उन्होंने दर्शनशास्त्र, ज्यामिति, गणित और बीजगणित का ज्ञान प्राप्त किया था, इसके साथ ही इन्होने बंगाली एवं उर्दू भाषा भी सीखा. आजाद को भी पढ़ाई का बहुत शौक थे और वे मन लगाकर पढ़ाई भी करते थे वे खुद से ही अंग्रेजी, विश्व का इतिहास एवं राजनीति के बारे में पढ़ा करते थे.

मौलाना अबुल कलाम आजाद जी शुरुवाती जीवन कैसा था?

मौलाना अबुल कलाम आजाद जी ने बहुत सी पत्रिकाओं में काम किया, वे साप्ताहिक समाचार पत्र ‘अल-मिस्वाह’ के संपादक भी थे इसके साथ ही इन्होने पवित्र कुरान के सिद्धांतों की व्याख्या भी अपनी दूसरी रचनाओं में की थी. इस समय वे कट्टरपंथी राजनीतिक दृष्टिकोण रखते थे जो भारतीय राष्ट्रवादी आंदोलन के साथ बदलकर राष्ट्रीयता के रूप में विकसित हो गई. वे ब्रिटिश राज और मुसलमानों के साम्प्रदायिक मुद्दों को तवज्जो नहीं देते थे क्युकी उनका ऐसा मानना था कि देश की आजादी इन सभी मुद्दों से कही ज्यादा बढ़ कर है मौलाना आजाद अफगानिस्तान, इराक, मिस्र,  सीरिया और तुर्की की यात्रा पर गए, जहाँ उनकी सोच बदल गयी और उनका विश्वास राष्ट्रवादी क्रांतिकारी के रूप में सामने आया.

भारत लौटने के बाद मौलाना आजाद जी ने प्रमुख हिन्दू क्रांतिकारियों श्री अरबिंदो और श्याम सुन्दर के साथ मिलकर सक्रिय रूप से स्वतंत्रता के लिए राष्ट्रीय संघर्ष में भाग लिया था. इस दौरान मौलाना आजाद जी ने देखा कि क्रांतिकारी गतिविधियों बंगाल और बिहार तक ही सीमित थी. दो सालों के अंदर मौलाना अबुल कलाम आजाद जी ने उत्तरी भारत और मुंबई भर में गुप्त क्रांतिकारी केंद्रों की स्थापना में मदद की. उस समय इन क्रांतिकारी केन्द्रों में ज्यादातर मुस्लिम विरोधी क्रन्तिकारी हुआ करते थे, क्यूंकि उन लोगों का मानना था कि ब्रिटिश सरकार भारत की आजादी के विरुद्ध मुस्लिम समुदाय का इस्तेमाल कर रही है. आजाद जी ने अपने सहयोगियों की मुस्लिम विरोधी सोच को बदलने की बहुत कोशिश की. उन्होंने सांप्रदायिक अलगाव-वाद के लिए ऑल इंडिया मुस्लिम लीग की याचिका को भी खारिज कर दिया था. वे भारत में नस्लीय भेदभाव के सख्त खिलाफ थे. एक मौलवी के रूप में शिक्षा लेने के बाद भी आजाद जी ने अपने इस काम को नहीं चुना और हिन्दू क्रांतिकारीयों के साथ मिलकर स्वतंत्रता की लड़ाई में हिस्सा लिया.

1940 में आजाद जी को रामगढ़ सेशन से कांग्रेस का प्रेसिडेंट बनाया गया. वहां उन्होंने धार्मिक अलगाव-वाद की आलोचना और निंदा की और साथ ही साथ भारत की एकता के संरक्षण की बात कही. भारत की आजादी के बाद मौलाना अबुल कलाम आजाद जी ने भारत के नए संविधान सभा के लिए कांग्रेस की तरफ से चुनाव लड़ा, भारत-पाकिस्तान विभाजन के समय, इन्होने भारत देश में मुस्लिम समुदाय की रक्षा की ज़िम्मेदारी ली. विभाजन के समय वे बंगाल, बिहार, पंजाब एवं असम भी गए थे जहाँ उन्होंने लोगों के लिए रिफ्यूजी कैंप बनवाए और उन्हें खाना एवं सुरक्षा प्रदान की. जवाहर लाल नेहरु की सरकार में मौलाना जी को पहले कैबिनेट मंत्रिमंडल में 1947 से 1958 तक शिक्षा मंत्री बनाया गये थे, मौलाना आजाद के तत्वाधान में ही देश का पहला IIT, IISC एवं विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का निर्माण हुआ था.

मौलाना आजाद उपलब्धियां कौन-कौन सी है?

  1. मौलाना आजाद के जन्म दिवस पर 1989 में भारत सरकार द्वारा शिक्षा को देश में बढ़ावा देने के लिए मौलाना आजाद एजुकेशन फाउंडेशन बनाया गया था
  2. मौलाना आजाद के जन्मदिन के अवसर पर हर साल 11 नवम्बर को नेशनल एजुकेशन डे मनाया जाता है.
  3. भारत के अनेकों शिक्षण संसथान, स्कूल, कॉलेज के नाम मौलाना आजाद जी के नाम पर ही रखे गये है.
  4. मौलाना अबुल कलाम आजाद जी को भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया है.

मौलाना अबुल कलाम आजाद जी मृत्यु कब हुई थी?

मौलाना आजाद जी की मृत्यु 22 फ़रवरी 1958 को स्ट्रोक के चलते अचानक से दिल्ली में मृत्यु हो गई. भारत में शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव लाने की शुरुवात मौलाना आजाद जी ने ही की थी और आज मौलाना जी के अथक प्रयासों के कारण ही भारत शिक्षा में इतना आगे बढ़ गया. मौलाना जी ये बात अच्छे से जानते थे कि देश की उन्नति एवं विकास के लिए शिक्षा का मजबूत होना बहुत जरुरी है इसीलिए वे अपने अंतिम दिनों में भी इसी ओर प्रयासरत रहे.

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आज आपने क्या सीखा?

दोस्तों हम उम्मीद करते है कि हमारा ये (Maulana Abul Kalam Azad Biography In Hindi)  आर्टिकल आपको काफी पसंद आया होगा और आपके लिए काफी हेल्पफुल भी होगा क्युकी इसमें हमने मौलाना अबुल कलाम आजाद जी के जीवन के बारे में पूरी जानकारी दी है

हमारी ये (Maulana Abul Kalam Azad Biography In Hindi)  जानकारी आपको कैसी लगी कमेंट करके जरुर बताइयेगा और ज्यादा से ज्यादा लोगो के साथ भी जरुर शेयर कीजियेगा.

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