कंप्यूटर का इतिहास क्या है? | History of computer in hindi

History of computer in hindi

आज के समय में कंप्यूटर हमारे जीवन में बहुत ही इम्पोर्टेन्ट रोल प्ले करता है बहुत से काम ऐसे हैं जिन्हें आप बहुत कम समय में और आसानी से कर सकते हैं. लेकिन क्या आपको कंप्यूटर के इतिहास के बारे में पूरी जानकारी है अगर नही, तो हमारे इस आर्टिकल को पूरा पढ़िए क्युकी इसमें हमने आपको कंप्यूटर के इतिहास के बारे में पूरी जानकारी दी है.

कंप्यूटर का इतिहास क्या है?

कंप्यूटर का इतिहास 5 हजार साल से भी ज्यादा पुराना माना जाता है 16वीं शताब्दी में चीन के गणितज्ञ “ली काइ-चेन” ने एक गणना यंत्र को बनाया था जिसका नाम abacus/गिनतारा था. इसका यूज 3 हजार से 35 सौ ई. पूर्व में चीन में इसका व्यापक रूप से उपयोग होने लगा था. इसका उपयोग मुख्य रूप से संख्याओं को जोड़ने और घटाने के लिए किया जाता था. यह एक लकड़ी के फ्रेम का बना होता था और इसमें छड़ें लगी होती थी इन छड़ों में बीड्स लगी होती थी.

History of computer in hindi
Image Credit: Shutterstock

इन बीड्स को ऊपर नीचे करके संख्याओं को जोड़ने या घटाने का काम किया जाता था आज के समय में भी चीन, रूस, जापान, पूर्वी एशिया के कुछ देशों में और भारत में भी कुछ स्थानों में इसका उपयोग किया जाता है इसे दुनिया का प्रथम गणना यंत्र कहा जाता है जापान में इसे सारोबान के नाम से भी जाना जाता है.

उसके बाद सन् 1617 ई. में स्काटलैण्ड के गणितज्ञ “जॉन नेपियर” ने नेपियर बोन्स का अविष्कार किया था. इसमें जोड़, घटाव और दशमलव के साथ-साथ गुणा भी कर सकते थे और इसे वर्ल्ड की पहली कैलकुलेटिंग मशीन भी कहा जाता था. ऐसा कहा जाता है कि यह मशीन “जॉन नेपियर की डेथ के बाद दुनिया के सामने आया था. सन् 1642 ई. में फ़्रांसीसी के महान गणितज्ञ “ब्लेज पास्कल” ने एक मैकेनिकल कैलकुलेटर को बनाया था जिसे “पास्कलाइन” या पास्कल का कैलकुलेटर कहा जाता था इसको पास्कल की एडिंग मशीन भी कहा जा सकता था. इसको वर्ल्ड का प्रथम मैकेनिकल कैलकुलेटर भी कहा जाता है और इससे जोड़ और घटाव बहुत ही आसान तरीके से किया जा सकता था.

पास्कल के पिता इसको गणनायें करने के लिए युज करते थे लगभग 1645ई. में इसको व्यापारिक स्तर पर बेचा भी गया था लेकिन पास्कल का इंटरेस्ट गणित और विज्ञान में होने के कारण ये इसमें ज्यादा धयन नही दे पाए जिससे इसमें ज्यादा सुधार नही हो सका.

उसके बाद जर्मन गणितज्ञ “लेबनिज” ने 1671 ई. में इसमें काफी सुधार किया जो जोड़ने घटाने और गुणा करने के साथ ही भाग करने में भी सक्षम था इसे लेबनिज का यांत्रिक कैलकुलेटर कहा गया, इसके लेबनिज की रेकोनिंग मशीन भी कहा जाता था. आज के समय में भी कई स्थानों पर इससे मिलती-जुलती मशीनों का यूज किया जाता है.

1801 ई. में फ़्रांसीसी बुनकर “जोसेफ-मैरी जैकार्ड” ने कपड़े बुनने के लिए एक ऐसी मशीन का निर्माण किया जिसका यूज कपड़े की डिजाइनिंग के लिए किया जाता था इसकी प्रमुख विशेता थी कि ये कार्डबोर्ड के छिद्रित पांच कार्डों के साथ कपड़े के पैटर्न को नियंत्रित करता था.

सन् 1822 में प्रसिद्ध ब्रिटिश गणितज्ञ चार्ल्स बैबेज ने गणित की कठिन से कठिन गणना करने के लिए एक यंत्र बनाया जिसे डिफरेंस इंजन (Difference Engine) कहा गया. इस मशीन में गीयर और शाफ़्ट लगा होता था और इसे चलने के लिए भाप की जरूरत होती थी उस समय इसका उपयोग बीमा, डाक, और रेल उत्पादन आदि जगहों पर किया जाता था.

उसके बाद चार्ल्स बैबेज ने डिफरेंस इंजन की सफलता से प्रेरित होकर सन् 1833 में एक शक्तिशाली मशीन एनालिटिकल इंजन (Analytical Engine) को बनाया जो डिफरेंस इंजन का विकसित रूप था. चार्ल्स बैबेज का एनालिटिकल इंजन आधुनिक कंप्यूटर का आधार बन गया और यही कारण है कि चार्ल्स बैबेज को कंप्यूटर का पिता कहा जाता है.

इस मशीन में प्रोसेस यूनिट लगाई गयी थी और ये मशीन यूजर द्वारा दिए गये इंस्ट्रक्शन्स के अनुसार कार्य करती थी. प्रोसेस यूनिट को कार्य करने के लिए इसमें प्रोग्रामिंग कोडिंग बहुत जरूरी थी तो प्रोग्रामिंग के लिए इन्होने लंदन की एक महिला Augusta Ada (इनका पूरा नाम Augusta Ada King- Noel, Countess of Lovelace) की मदद ली. Ada को वर्ल्ड की प्रथम महिला प्रोग्रामर भी माना जाता है.

इस मशीन के पांच भाग थे-

  1. इनपुट यूनिट- आंकड़ो को ग्रहण करने के लिए,
  2. स्टोर- आंकड़ो और निर्देशों को ग्रहण करने के लिए
  3. Mill/मिल- अंकगणित क्रियायें करने के लिए
  4. कंट्रोल यूनिट- स्टोर तथा मिल संख्याओं और निर्देशों को कंट्रोल करने के लिए
  5. आउटपुट यूनिट- परिणाम दिखाने/प्रिंट करने के लिए.

सन् 1890 ई. में अमेरिका के एक वैज्ञानिक “डॉ. हर्मन होलरिथ” ने Tabulating Machine का निर्माण किया जो कि जनगणना के लिए इस्तेमाल किया जाता था. ये पहली ऐसी मशीन थी जो विद्युत से चलती थी. इस मशीन में इलेक्ट्रोमैकेनिकल पंचकार्ड का उपयोग किया जाता था जिसमे पंचकार्डों को विद्युत द्वारा संचालित किया जाता था. जहाँ पर जनगणना करने में 10 साल लगते थे वहां पर इस मशीन की मदद से सिर्फ 2 साल ही लगते थे. पंचकार्ड का अविष्कार “हर्मन होलरिथ” ने किया था इन्होने एक कोड विकसित किया जिसे “होलरिथ कोड” कहा जाता था.

इस कोड के उपयोग (History of computer in hindi) से पंचकार्ड में डाटा स्टोर किया जाता था. कंप्यूटर इतिहास में,  इस पंचकार्ड मशीन के निर्माण से भविष्य में सूचनाओं को संग्रहित करने के लिए संभव हो गया,  उसके बाद हर्मन होलरिथ ने सन् 1896 ई. में अपनी टैबुलेटिंग मशीन कंपनी बनाई और ये इस कंपनी में इसमें टैबुलेटिंग मशीन भेजा करते थे.

बाद में यही कंपनी इंटरनेशनल बिज़नेस मशीन कॉर्पोरेशन (IBM) के नाम से प्रसिद्ध हो गयी, जो आज भी दुनिया में कंप्यूटर बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनी है. सन् 1911 में इस कंपनी का नाम कंप्यूटिंग-टेबलिंग-रिकॉर्डिंग रखा गया था लेकिन बाद में सन् 1924 में इसका नाम बदल कर IBM रख दिया गया. होलरिथ को पंचकार्ड का पिता भी कहा जाता है.

उसके बाद सन् 1930 में Vannevar Bush ने डिफरेंशियल एनालाइसर (Differential Analyser) बनाया था. डिफरेंशियल एनालाइसर आज के एनालॉग कम्पुटर की तरह की काम करता था.

उसके बाद सन् 1939 में IBM के इंजिनियर्स और हॉवर्ड विश्वविद्यालय के डॉ. हॉवर्ड आइकेन और ग्रेस हॉपर ने मिलकर एक कंप्यूटर का निर्माण किया जो बिजली से चलता था. यह विश्व का प्रथा इलेक्ट्रॉनिक मैकेनिकल कंप्यूटर थे यह कंप्यूटर सन् 1944 में बनाकर तैयार हुआ था. इसके पहले इसका नाम आटोमेटिक सीक्वेंस कंट्रोल्ड कैलकुलेटर था और बाद में इसका ये नाम बदल कर मार्क-1 रख दिया गया. यह कंप्यूटर 20 अंको वाली दो संख्याओं का गुणा 5 सेकंड में और 12 सेकंड में भाग कर सकता था जो कि आजकल के कैलकुलेटर इससे कई गुना तेजी से गणनाएं कर सकते है.

इस कंप्यूटर की सबसे (History of computer in hindi) बड़ी दिक्कत थी कि यह आवाज बहुत ज्यादा करता था और बहुत तेज गर्मी भी उत्पन्न करता था. इसका आकार बहुत भारी था और इसकी लम्बाई 12 मीटर थी लेकिन बाद में और भी सुधार किये गये. उसके बाद इसी समय में कुछ और भी कंप्यूटर बने जैसे- ABC इसका पूरा नाम Atanasoff Berry Computer था. इसको सन् 1945 ई. में एटानासेफऔर क्लोफोर्ड बेरी ने मिलकर इस इलेक्ट्रोनिक मशीन का विकास किया था. यह विश्व का प्रथम डिजिटल कंप्यूटर था उसके बाद सन् 1941-1946 के बीच में ENIAC कंप्यूटर का निर्माण किया गया इसका पूरा नाम Electronic Numeric Integrator and Computer था. यह प्रथम सम्पूर्ण इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर था इसमें प्रोग्राम को स्थाई रूप से समाहित किया गया.

इसमें वैक्यूम (History of computer in hindi0 ट्यूब का प्रयोग भी किया गया था इसका साइज़ लगभग एक कमरे के बराबर था इसको यूनाइटेड स्टेट्स की आर्मी के लिए बनाया गया था जो उनकी Artillery (तोपखाने) की फायरिंग टेबल को कैलकुलेट करता था. ENIAC का सबसे पहले उपयोग दूसरे विश्व युद्ध में हाइड्रोजन बम के निर्माण के उसके कैलकुलेशन करने के लिए किया गया था. बाद में इसका यूज मौसम का पता लगाने, और भी कई कामों के लिए किया जाने लगा.

इसी के बेस पर इसके बाद के सभी कंप्यूटरों का निर्माण किया जाने लगा  इसके बाद कई कंप्यूटरों का निर्माण हुआ जैसे-

सन् 1949- एडसैक (ADSAC)

इसका पूरा नाम Electronic Delay Storage Automatic Calculator है.

सन् 1950- एडवैक (EDVAC)

इसका फुल फॉर्म Electronic Discrete Variable Automatic Computer है.

सन् 1951- लिओ-1 (LEO-1) और यूनीवैक-1 (UNIVAC-1)

LEO-1 का पूरा नाम Lyons Electronic Office-1 और यूनीवैक -1 का पूरा नाम Universal Automatic Computer-1 है.

इसे भी पढ़ें?

इन्टरनेट क्या है? 

Computer generation क्या है? 

कंप्यूटर क्या है? 

Magnetic Disk क्या है?

आज आपने क्या सीखा?

हम आशा करते हैं कि हमारा ये (History of computer in hindi) आर्टिकल आपके लिए काफी हेल्पफुल होगा और आपको काफी पसंद भी आया होगा क्युकी इसमें हमने आपको कंप्यूटर के इतिहास के बारे में पूरी जानकारी दी है.

हमारी ये (History of computer in hindi) जानकारी आपको कैसी लगी कमेंट करके जरुर बताइयेगा और ज्यादा से ज्यादा लोगों के साथ शेयर भी कीजियेगा.

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published.