गोरखा कमांडो कौन होता है? | गोरखा कमांडो की ट्रेनिंग कैसे होती है?

gorkha commando kaun hota hai

दोस्तों आप में से बहुत से कैंडिडेट गोरखा कमांडो के बारे में जानते होंगे लेकिन कुछ कैंडिडेट ऐसे होंगे जिन्हें इसके बारे में जानकारी नही होगी इसीलिए आज इस आर्टिकल में हम आपको गोरखा कमांडो से रिलेटेड कुछ जानकारी देंगे.

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गोरखा कमांडो कैसे होते है?

नेपाल में गोरखा नाम का हिमालय की तराई में बसा हुआ एक छोटा-सा गांव है गोरखा या गोरखाली नेपाल के मूल निवासी हैं इन्हें ये नाम हिन्दू संत योद्धा श्री गुरु गोरखनाथ ने दिया था गोरखा किसी एक जाति के योद्धा/ जवान नही होते हैं बल्कि ये पहाड़ियों पर रहने वाले कई जातियों के लोगो से मिलकर ये रेजिमेंट तैयार की जाती है जन्म के साथ ही यहां के बच्चों को यह सिखाया जाता है कि डर कर जीने से अच्छा मर जाना होता है. इंडियन आर्मी में गोरखा रेजिमेंट को दुश्मनों से बहादुरी से लड़ने के लिए भी जाना जाता है. अप्रैल 1815 में गोरखा रेजिमेंट इंडियन आर्मी में जुड़ी थी और आज तक कई लड़ाइयों में इंडियन आर्मी के साथ मजबूती से साथ निभाती आई है आज के समय में भी दुनिया के सिर्फ तीन देशों- नेपाल, ब्रिटेन और इंडिया के पास ही गोरखा रेजिमेंट है. 

गोरखा कमांडो के पास एक तेजधार वाली खुखरी होती है जो एक नेपाली कटार है और यह सेना में गोरखा रेजीमेंट के सैनिकों को दिया जाता है जो सामने वाले दुश्मन को मार गिराने के लिए काफी होता हैं. खुखरी एक ऐसा हथियार होता है जो बहुत खतरनाक होता है यह 12 इंच लंबा चाकू होता है यह सिर्फ गोरखा सैनिक के पास होता है क्युकी गोरखा सैनिकों की ट्रेनिंग पूरी होने के बाद उन्हें यह खुखरी दी जाती है ये दुश्‍मनों से लड़ाई में काफी मददगार होता है.

गोरखा कमांडो की ट्रेनिंग कैसे होती है?

गोरखा सैनिकों की ट्रेनिंग 42 हफ्ते की होती है इनकी ट्रेनिंग बहुत खतरनाक और कठिन होती है भारत के फ़ील्ड मार्शल सैम मानेक शाह ने कहा था कि ‘अगर किसी व्यक्ति कहता है कि उसे मरने से बिलकुल डर नही लगता है तो ऐसे या तो कैंडिडेट झूठ बोला रहा है या फिर वो गोरखा है’ इसमें कैंडिडेट फिजिकली और मेंटली तौर पर काफी मजबूत हो जाते हैं और वे ट्रेनिंग के बाद किसी भी हालात में देश की सेवा करने तैयार हो जाते हैं, ट्रेनिंग में उन्हें छोटे और बड़े सभी तरह के हथियार चलाना सि‍खाया जाता है जिससे वे लड़ाई में किसी भी हथियार को आसानी से इस्तेमाल कर सकें, इसमें कैंडिडेट की आमने-सामने की लड़ाई की ट्रेनिंग भी होती है, जिसमें उन्हें सामने से दुश्मन को मात देने के बारे में सि‍खाया जाता है सेना में गोरखा रेजीमेंट के सैनिकों को ट्रेनिंग पूरी होने के बाद अलग-अलग जगहों पर भेज दि‍या जाता है.

गोरखा रेजिमेंट का गठन कब हुआ?

गोरखा रेजिमेंट का गठन 24 अप्रैल 1915 में किया गया था यह रेजिमेंट सिर्फ भारत का नही बल्कि पूरी दुनिया की सबसे बहादुर रेजिमेंट में से एक है  गोरखा समुदाय के लोग हिमालय की पहाड़ियों, नेपाल और उसके आस-पास के इलाके में रहते हैं.

गोरखा रेजिमेंट ने पहले और दूसरे विश्व युद्ध में शामिल होकर दुश्मनों के छक्के छुड़ा दिए थे पहले विश्व युद्ध के दौरान कुल 2 लाख गोरखा सैनिक शामिल हुए थे जिनमें से लगबग 20,000 गोरखा सैनिक शहीद हुए थे और दूसरे विश्व युद्ध में 2.5 लाख गोरखा सैनिक शामिल हुए थे जिन्होंने विश्वयुद्ध में देश की तरफ से काफी भारी समर्थन दिया था. हमारी भारतीय सेना इतनी ज्यादा ताकतवर है कि वो किसी भी देश की सेना से लोहा लेने के लिए कभी तैयार रहती है लेकिन ऐसे में गोरखा सैनिक भी भारतीय सेना के लिए बहुत ही मजबूत और अमूल्य भाग रहे हैं, हमारी भारतीय सेना में लगभग 40,000 गोरखा मौजूद हैं किसी एक रेजिमेंट के लिए भारतीय सेना में हर साल लगभग 1200 से 1300 तक गोरखा सैनिक भर्ती किये जाते हैं जो हर मुश्किल परिस्थितियों में हमेशा अपनी जान की बाजी लगाने के लिए तैयार रहते हैं.

भारत ने जिन अहम युद्ध में दुश्मनों को हराया है उन सभी में गोरखा रेजिमेंट ने काफी ज्यादा योगदान दिया है भारत की गोरखा सैनिक सबसे खतरनाक होती है और ऐसे में दुश्मन को सबसे खतरनाक और दर्दनाक मौत गोरखा सैनिकों द्वारा दी जाती है. इनके बारे में ऐसा कहा जाता है कि अगर उन्होंने एक बार अपनी खुखरी म्यान से बाहर निकाल लिया तो बिना खून का कतरा बहाये वो खुखरी को वापस म्यान में नहीं रखते है ऐसे में अगर खुखरी में दुश्मनों का खून नहीं लगा तो उसके मालिक को अपना खून बहाकर उसमें लगाना होता है तभी जाकर उसे म्यान में वापस डालने की इजाजत दी जाती है और ये गोरखा सैनिक इतने ईमानदार होते है कि जब वो किसी का खून नहीं बहाते है तो वो अपना ही खून बहाकर अपनी खुखुरी को सलामी देते हैं. पाकिस्तान के खिलाफ़ 1965 और 1971 की जंग में भी गोरखा राइफल्स के जवानों की अहम भूमिका रही थी संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में भी इनकी प्रमुख भूमिका रही थी गोरखा रेजिमेंट को परमवीर चक्र महावीर चक्र जैसे तमाम सौर्य सम्मानों से भी सम्मानित किया जा चुका है.

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आज आपने क्या सीखा?

दोस्तों उम्मीद करते है कि हमारी ये (gorkha commando kaun hota hai) जानकारी आपको पसंद आई होगी और आपके लिए काफी हेल्पफुल भी होगी क्युकी इसमें हमने आपको गोरखा कमांडो से रिलेटेड पूरी इनफार्मेशन दी है.

इसी के साथ हमारी ये (gorkha commando kaun hota hai) जानकारी आपको कैसी लगी कमेंट करके जरुर बताइयेगा और जो कैंडिडेट गोरखा कमांडो से रिलेटेड जानकारी चाहते हो उनके साथ भी जरुर शेयर कीजियेगा.

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