भारत में ओलम्पिक क्यों नही होता है? | Olympic game in hindi

bharat me olympic kyu nahi hai

इंडिया में कई सारे गेम्स कराए जाते हैं लेकिन आज तक कभी भी ओलम्पिक क्यों नही कराया, जबकि अन्य कई देश जैसे-  जापान, इटली और आस्ट्रेलिया जैसे देशों ने ओलम्पिक कराया है तो आज इस आर्टिकल में हम आपको बतायेंगे कि क्या कारण है जिससे भारत में ओलम्पिक नही होता है.

भारत में ओलम्पिक न कराए जाने के कारण क्या है?

  1. ओलम्पिक होस्ट करना बहुत ही ज्यादा महंगा है ओलम्पिक होस्ट करना कोई छोटी बात नही है इसके लिए पूरा एक ओलम्पिक विलेज बनाना होता है ट्रांसपोर्टेशन का इंतजाम करना होता है पूरे वर्ल्ड के एक्सपर्ट खिलाड़ी आते हैं उनके रुकने की पूरी व्यवस्था करानी पड़ती है 35 अलग-अलग गेम्स को कराने के लिए वैन्यूस डिजाईन करते पड़ते हैं और सुरक्षा व्यवस्था भी अच्छे से करनी होती है इस सब चीजों में बहुत ही ज्यादा खर्च आता है एक ओलम्पिक गेम होस्ट करने के लिए लगभग 14 बिलियन डॉलर या इससे भी कुछ ज्यादा रूपये खर्च करने पड़ते हैं लेकिन इंडिया जैसे देश के लिए ओलम्पिक कराना कोई बहुत बड़ी बात नही है लेकिन भारत में भ्रष्टाचार बहुत ज्यादा होने के कारण यहाँ पर जो भी गेम कराए जाते हैं या जो भी आयोजन होते हैं उसका खर्च बढ़ जाता है.

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2003 में जब कॉमन वेल्थ गेम कराया गया था तो बहुत ही ज्यादा घोटाला किया गया था जिसके चलते भारत का नाम और इंटरनेशनल स्पोर्ट्स पटल पर परमानेंटली पूरी तरह से खराब कर दिया गया था क्युकी कॉमन वेल्थ गेम कराने का बजट 16 बिलियन रूपये तय किया गया था लेकिन गेम ख़त्म होने के बाद बजट जोड़ा गया तो 700 बिलियन का बजट आया एस्टीमेशन में इतना ज्यादा घोटाला किया गया था इतना खर्च करने के बाद और 7 साल का एक्स्ट्रा टाइम मिलने के बाद भी भारत उस टाइम कॉमन वेल्थ के लिए वेन्यूस रेडी नही कर पाया था मतलब कि कॉमन वेल्थ विलेज को रेडी नही कर पाया था. इंटरनेशनल ओलम्पिक कमिटी जो ओलम्पिक होस्ट करवाने की मंजूरी देती है उनके सामने इंडियन कमिटी अपना प्रस्ताव नही रख पा रही है.

  1. मीडिया राइट्स, टीवी राइट्स ओलम्पिक इंटरनेशनल कमिटी (इसके द्वारा ये तय किया जाता है कि ये गेम्स कब और कहाँ होंगे और इन्हें कैसे एक्सिक्यूट करना चाहिए इसके द्वारा ये भी डिसाईड किया जाता है कि किस देश को ओलम्पिक होस्ट करने का अधिकार मिलेगा).

2016 में रिओलम्पिक कराया गया था जिसमे ब्राजील देश ने अपने शहर रिओ डेजनेइरो का नाम प्रस्तावित किया था जिसे इंटरनेशनल कमिटी द्वारा एक्सेप्ट किया गया और वहां पर गेम्स करवाया था ओलम्पिक गेम की पूरी गाइड लाइन इंटरनेशनल कमिटी द्वारा तय की जाती है.

आज से कई साल पहले जब ओलम्पिक गेम्स की शुरुआत हुई थी तो जो टीवी राइट्स होते हैं जिनके द्वारा गेम्स को प्रसारित किया जाता था उसमे राइट्स के शेयर का 4% इंटरनेशनल कमिटी लेती थी और बाकि की पूरी कमाई उस देश/शहर को जाती थी जो इस ओलम्पिक गेम को होस्ट करता था लेकिन आज के टाइम में जब 2016 में रिओ डेजनेइरो में ओलम्पिक हुआ था तो इंटरनेशनल कमिटी ने 70% शेयर लिया था तो ऐसे में जो देश होस्ट करता है उसको कुछ नही मिलता है, इस गेम को कराने के बहुत खर्च लगता हैं और इसमें कमाई बहुत कम होती है इसीलिए इंडिया ओलम्पिक कराने में पीछे रहती है.

  1. ये ओलम्पिक गेम्स 1 से ढेढ़ महीने तक कराए जाते हैं उसके बाद गेम खत्म हो जाते हैं लेकिन ये ओलम्पिक गेम्स करवाने के लिए जो अलग-अलग वैन्यूस या स्टेडियम्स बनवाए जाते है वो गेम्स खत्म होने के बाद वैसे ही पड़े रहते हैं अगर उनको मेंटेन रखना है तो हर महीने चाहे वो कोई भी देश हो उसे 30 मिलियन डॉलर खर्च करना होगा और हर साल  लगभग अरबों/खरबों रूपये खर्च करने होंगे तभी वो स्टेडियम/वैन्यूस मेंटेन रहेगा और गेम्स के खत्म हो जाने के बाद इसमें कोई न्यूटलाइजेशन भी नही हो पाता है और इसी कारण से भारत ओलम्पिक गेम का आयोजन कराने में पीछे रहता है.
  2. जिन देशों/शहरों में ओलम्पिक कराया जाता है उन देशों/शहरों की गर्त बन गयी है जब ओलम्पिक कराए जाते हैं तो कई सारी चीजों को देखा जाता हैं और इंटरनेशनल ओलम्पिक कमिटी द्वारा ये भी देखा जाता है कि स्टेडियम/वेन्यूस बस अड्डों से कितनी दूर हैं, ट्रेन स्टेशन से कितनी दूर है, एयरपोर्ट से कितनी दूर है, ऑकोमेडीशन्स से कितनी दूर है और मेन सिटी से कितनी दूर है क्युकी जो विलेज/स्टेशन/वेन्यूस हों वो मेन सिटी से बांड सटा हुआ होना चाहिए इसलिए उस देश/उस शहर द्वारा बड़ी जमीन को अग्वायर किया जाता है तो पहले वहां से लोगों को हटाया जाता है उसके बाद वहां पर वेन्यूस बनाया जाता है और उस बड़ी जमीन को अग्वायर करने में काफी खर्च भी लगाया जाता है तो गेम खत्म होने के बाद ये ऐसे ही पड़े रहते हैं ऐसे में अगर इस जमीन पर फिर से ओरियल स्टेट प्रॉपर्टी के बारे करें तो उस रियल स्टेट की प्रॉपर्टी का कुछ पैसा नही मिल पाता है क्युकी उस जमीन का रेट बहुत कम हो जाता है तो उस शहर का बहुत ही ज्यादा नुकसान होता है जिसके द्वारा ये ओलम्पिक कराया जाता है.
  3. अगर आप सर्च करेंगे तो आपको नेगेटिव आर्टिकल्स की लिस्ट मिलेगी जिसमे कई सारे ऐसे देश थे जो ओलम्पिक गेम करवाने के लिए तैयार नही थे फिर भी उनसे ये गेम करवाया गया और इससे एन्वोर्न्मेंट खराब हो गया और कई देश देश बर्बाद हो गये, ओलम्पिक जैसे गेम्स को करवाने में अगर छोटी सी भी गलती हुयी तो इससे उस देश का नाम बदनाम हो सकता है इसीलिए इंडियन ओलम्पिक गेम करवाने से डरते हैं और इंटरनेशनल ओलम्पिक कमिटी के सामने ओलम्पिक करवाने का प्रस्ताव नही रखती है.

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आज आपने क्या सीखा?

हमे उम्मीद है कि हमारा ये (bharat me olympic kyu nahi hai) आर्टिकल आपको काफी पसंद आया होगा इसमें हमने आपको इस बारे में पूरी जानकारी दी है कि किस कारण से भारत में ओलम्पिक नही कराया जाता है,

हमारी ये (bharat me olympic kyu nahi hai) जानकारी आपको कैसी लगी कमेंट करके जरुर बताइयेगा और ज्यादा से ज्यादा लोगों के साथ शेयर भी जरुर कीजियेगा.

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